बिहार के दो भाइयों का प्रयास, छोटे शहरों में भी हो शिक्षा का विकास

सही शिक्षा का आभाव

दसवीं क्लास तक बिहार के छोटे शहर के बहुत से स्कूल बहुत अच्छा रिजल्ट देते है। पर हाई स्कूल में गुणवत्ता आभाव में IIT का परीक्षा तो छोड़िये बारहवीं की परीक्षा पास करने में तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता है। गए वर्ष, आपको ताजुब होगा की, छपरा शहर के महज़ 50 प्रतिसत विद्यार्थी ही सीबीएसई के बारहवीं बोर्ड का एग्जाम पास कर पाये थे।

ShardaClassesChapra

नयी शुरुवात

इन्ही परेशानियों से गुज़रे छपरा शहर के दो भाइयो ने अपनी सच्ची लगन और कड़ी मेहनत से पहले तो IIT की प्रवेश परीक्षा पास करी और देश के उच्चतम श्रेणी के कॉलेजों में प्रवेश पाया। अपनी पढ़ाई के बाद लाखो की सैलरी देने वाली नौकरयिा पायी। पर यही समय था जब इन्हे उन लोगो का अहसास हुआ, जो दसवी तक इनके साथ पढ़ते थे ऑप्शन के आभाव में 12वि की परीक्षा तक पास नहीं कर पाये थे।

दोनों भाइयो ने दृढ़ निश्चय और पुरे विश्वास से छपरा वापस लौटने का फैसला लिया और पिछले वर्ष शुरुआत की “Sharda Classes” की।

सिद्धार्थ सिंह और वसु मित्र, दो ऐसे भाई है, जिन्होंने IIT JEE पास करने के बाद, उँची तनख्वाह वाली नौकरियां ठुकरा कर आज अपने शहर छपरा (बिहार) में high-school बच्चों को IIT प्रवेश परीक्षा की तैयारी करा रहे है।

एक कदम विकाश की ओर

“Sharda Classes” के नाम से इस की शुरुआत पिछले साल हुई जिसमे आज 50 से ज्यादा छात्र-छात्रायें अपने सपने को साकार करने में लगे हुए है। कल तक जो कोटा की राह को नापते थे वो भी इन दोनों भाइयो के प्रयास की तरफ आकर्षित है। “Sharda Classes” खास कर लड़कियो के लिए सपना सा बन कर आया है, जिन्हे पहले दूसरे शहर भेजना अभिभावकों के लिए मुश्किल था अब बिना सोचे वो इसका हिस्सा बन रहे है।

दो भाइयो की कहानी

सिद्धार्थ सिंह, IIT Kanpur से पढ़े है और साथ ही साथ, इन्होने कोटा के मसहूर कोचिंग बंसल क्लासेज में भी २ सालों तक physics पढ़ाया है। महत्वपूर्ण बात ये है की खुद इन्होने विश्व के कठिनतम प्रवेश परीक्षा, IIT JEE को खुद बिना किसी कोचिंग के छपरा में रह कर पास किया और IIT कानपूर जा कर शहर का गौरव बढ़ाये।
वसु मित्र (इनके अपने छोटे भाई) ने भी ठीक 2 वर्ष बाद 2008 में IIT की परीक्षा पास करी और देश के IISER, पुणे, सर्वोत्तम रिसर्च इंस्टिट्यूट में एडमिशन लिया। वहाँ से लाखो की नौकरी मिली जहा मुश्किल से १ साल काम कर इन्होने “Sharda Classes” का आईडिया बनाया और अपने बड़े भाई के साथ इसकी नीव रखी।

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बना रहे है देश का भविष्य

नविन तकनीको से और अपने तज़ुर्बे से पढ़ते हुए छात्रों में गज़ब का कॉन्फिडेंस भरते ये दो भाई, शिक्षा को एक नयी दिशा दे रहे है। छोटे शहरों में इस तरीके के शुरुवात से ही भारत अपने विकशित होने का दावा कर सकती है। शिक्षा का प्रसार, एक सही गुणवत्ता वाली शिक्षा का प्रसार अत्यंत जरुरी है क्युकी आप और हम जानते है की ये 50 छात्र-छात्राएं जो Sharda Classes में पढ़ रहे है वो ही आगे चल कर बहुत कामयाब इंजीनियर बनेगे।

आप भी इस शुरुवात से जुड़ सकते है, डाउनलोड करे Eckovation,

जुड़े Sharda Classes से, जुड़ने के लिए ग्रुप कोड है: 543679

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